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Vikas dubey Surrender : जब व्यवस्था मुजरा कर रही थी, तब मदमस्त सत्ता विकास दूबे के सरेंडर का स्क्रिप्ट तैयार कर रही थी

Vikas dubey Surrender : व्यवस्था भी नाचने वाली के कोठे की तरह से है। जिसका काम है कोठे पर आने वाले का स्वागत करना और...
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Corona Warriors : कोरोना योद्धा सम्मान की असली हक़दार हैं ” आप ” की ज़िला अध्यक्ष अनीता भट्ट

देह सिवा बरु मोहि इहै सुभ करमन ते कबहूं न टरों। न डरों अरि सो जब जाइ लरों निसचै करि अपुनी जीत करों ॥ Corona...
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मजलूमों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले समाजसेवी Dr. Kafeel को किस जुर्म की सज़ा मिल रही है ?

दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील अहमद 10 अगस्त 2017 को उस समय सुर्ख़ियों में आये...
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Politics : राजनैतिक टकराव में फंसा मजदूर, दर – बदर भटकने, भूख और अव्यवस्था से मरने को मजबूर

दिल्ली। कोरोना महामारी के दौरान देश भर में लगे लॉक डाउन में सामान्य परिवारों को कोई खास फर्क भले ही न पड़ा हो लेकिन देश...
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चुनाव में पानी की तरह पैसे बहाने वाले और धर्म व समाज के कथित रक्षक अचानक नपुंसक कैसे हो गये ?

कहा है ? श्रम मंत्रालय, श्रम विभाग, श्रम कानून, मजदूर सन्गठन, मजदूरों के नेता ? पीठ पर छोटे से बैग में दो जोड़ी कपड़ा, सुखी...
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Mothers Day : माँ सुख की छाया तू दुख के जंगल में !-ध्रुव गुप्त

लेखक: ध्रुव गुप्त, आईपीएस दुनिया की किसी भी भाषा का सबसे मुलायम, सबसे आत्मीय, सबसे खूबसूरत शब्द है "मां"। हमारा पहला प्यार मां होती है।...
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CoronaFighters : योद्धाओं द्वारा योद्धाओं का सम्मान !

यह अद्भुत दृश्य है। आज भारतीय वायुसेना के विमानों द्वारा देश के कोने-कोने में स्थित कोरोना अस्पतालों में अपनी जान और परिवार को बाज़ी पर...
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Media : ख़बरों से बेख़बर मीडिया, भटकता जा रहा है अपने नैतिक कर्तव्यों से

ऐसे वक्त में जब पूरा देश महामारी से जूझ रहा है, तब देश का मीडिया झूठी खबरें प्लांट करने और अफ़वाह फैलाने में व्यस्त है।...
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रामायण ईमानदारी के साथ सुख-दुख, मान-अपमान में विचलित हुए बिना निस्वार्थ भाव से कर्म पथ पर बढ़ते रहने की शिक्षा देने वाला एक ऐतिहासिक महाकाव्य है

(लेखक: संतोष राय, सहारा समय) रामायण देख चुकने के बाद अगर आपके मन में राम, सीता, हनुमान के प्रति अगाध श्रद्धा पैदा हो जाए और...
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Labour Day : ‘श्रमिक दिवस’ पर देश के श्रमिकों, हम शर्मिंदा हैं ! – ध्रुव गुप्त

(लेखक: ध्रुव गुप्त, आइपीएस) श्रमिक हमारी सभ्यता-संस्कृति के निर्माता भी हैं और वाहक भी। हजारों सालों तक मनुवादी संस्कृति ने उन्हें वर्ण-व्यवस्था के सबसे निचले...