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हाथरस : चंद्रशेखर आज़ाद के मनीषा मामले में पुनः हस्तक्षेप से जागा शासन और प्रशासन, अदालत ने सुनाया आरोपी को फांसी की सजा

दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हाथरस बलात्कार और हत्या मामले में भीम आर्मी चंद्रशेखर आज़ाद के पुनः हस्तक्षेप के बाद मामला फिर सुर्ख़ियों में हैं। २२ सितंबर २०२१ को सोशल मीडिया में अचानक ट्रेंड करने लगा कि २३ सितंबर २०२२ को भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद हाथरस पीड़ित परिवार मिलने उनके घर जायेंगें। इस खबर के वाइरल होने के बाद शासन और प्रशासन के हाथ पैर फूल गए उन्होंने आनन फानन में तमाम सरकारी अमला को हाथरस में लगा दिया। गांव वालों का कहना है कि प्रशासन ने ऐसा माहौल बनाया था जैसे सूबे के सीएम आने वाले हैं।
२३ सितंबर को चंद्रशेखर आज़ाद का काफिला तय समय से हाथरस पहुंचा लेकिन गांव के बाहर ही पुलिस ने काफिले को रोक लिया, हज़ारों की संख्या में मौजूद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और सैकड़ों गाड़ियों को ज्यादा देर तक तक रोक पाना पुलिस के लिए नामुमकिन था लिहाज़ा थोड़ी देर तक चली जद्दोजहद के बाद चंद्रशेखर आज़ाद को अपने कुछ पदाधिकारियों के साथ पीड़ित परिवार के घर तक जाने की अनुमति मिल गयी।

पीड़ित परिवार के घर के बाहर पड़ा कूड़े का ढेर और टूटी सड़क देख कर भड़के आज़ाद
पीड़ित परिवार के घर के बाहर कूड़े का ढेर और जर्जर सड़क को देख कर चंद्रशेखर आज़ाद आग बबूला हो गए और उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलने के बाद उनके घर ही से योगी सरकार को सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण करके चेतावनी दिया कि तत्काल अगर पीड़ित परिवार के घर के बाहर की सड़क नहीं बनवायी गयी और कूड़ा नहीं हटाया गया तो मैं यहीं से आंदोलन शुरू करूंगा और आज रात मैं पीड़ित परिवार के साथ गुजारूंगा। फेसबुक लाइव प्रसारण के कुछ घंटों के भीतर ही जिला प्रशासन ने आनन फानन में सड़क को बनाने का कार्य रात को ही शुरू कर दिया।

योगी सरकार का सब वादा झूठा, पीड़ित परिवार को न मिली नौकरी और न ही आवास
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने हाथरस पीड़ित परिवार से मिलने के बाद योगी सरकार पर पीड़ित परिवार के भेदभाव करने और झूठा वादा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पीड़ित परिवार के साथ धोखा किया है। अभी तक पीड़ित परिवार को न तो मकान मिला है और न ही नौकरी बल्कि उल्टा पीड़ित परिवार और उसके वकील को धमकाया जा रहा है।

डीएम को सौंपा ज्ञापन
आज़ाद ने हाथरस के जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर पीड़ित परिवार की सुरक्षा और एक सरकारी नौकरी एवं नॉएडा में एक आवास देने की मांग का ज्ञापन सौंपा। जिलाधिकारी , पुलिस अधीक्षक ने आज़ाद को जल्द से उनकी मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया।

अदालत ने सुनाया फांसी की सजा
एक अन्य मामले में एडीजीसी राजपाल सिंह दिसवार के मुताबिक मामला सिकंदराराऊ क्षेत्र एक गांव का है। 15 अप्रैल 2019 को 14 वर्ष की किशोरी अपनी नानी के पास घर पर थी। माता-पिता किसी रिश्तेदारी में गए थे। रात के करीब दस बजे मोनू ठाकुर पुत्र अनिल निवासी रमिया नगला सिकंदराराऊ आ गया। किशोरी छत पर खाना बना रही थी। तभी मोनू ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। किशोरी ने विरोध किया तो मोनू ठाकुर ने केरोसिन डालकर किशोरी को जिंदा जला दिया। तभी पीड़िता की नानी आ गई और उसने मोनू को पहचान लिया। मोनू धमकी देकर वहां से भाग निकला। परिवार के लोग घायल किशोरी को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। इलाज के 17 दिन बाद किशोरी की मौत हो गई।

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किशोरी की मृत्यु के उपरांत इस मामले में धारा 354, 354 क, 326 ए, 452, 302,376 व पोक्सो अधिनियम में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। तभी से मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम कोर्ट में चल रही थी। गुरुवार को एडीजे प्रतिभा सक्सेना ने धारा 302 में मृत्युदण्ड व पचास हजार रुपये का अर्थदण्ड लगाया है। अर्थदण्ड अदा न करने पर उसे छह माह का साधारण कारावास भोगना होगा। धारा 326ए में सश्रम आजीवन कारावास और पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

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