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Ziauddin Murder : STF प्रभारी देवेन्दर पाल सिंह की दरिंदगी से तड़पता रहा ज़ियाउद्दीन, पानी मांगने पर भी पीटता रहा दरिंदा

Ziauddin Murder : STF प्रभारी देवेन्दर पाल सिंह की दरिंदगी से तड़पता रहा ज़ियाउद्दीन, पानी मांगने पर भी पीटता रहा दरिंदा

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Ziauddin Murder : अकबरपुर (अम्बेडकर नगर)। अक्सर विवादों में रहने वाली यूपी पुलिस का दरिंदगीपूर्ण चेहरा एक बार फिर सामने आया है। आजमगढ़ ज़िले के हाजीपुर थाना पवई निवासी ज़ियाउद्दीन की पुलिस हिरासत में हुई मौत। ज़ियाउद्दीन के परिवार का आरोप है कि ज़ियाउद्दीन #Ziauddin की मौत अकबरपुर #ambedkar nagar पुलिस की बर्बरता के कारण हुई है। २४ मार्च २०२१ को आजमगढ़ ज़िले के हाजीपुर थाना पवई निवासी ज़ियाउद्दीन अपने किसी रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए जा रहे थे, रास्ते से अकबरपुर (Ambedkar Nagar ) की पुलिस ने किसी मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लेलिया और ज़िले से लगभग २० किलोमीटर दूर ग्रामीण क्षेत्र के किसी थाने में ले जा कर जानवरों की तरह से ज़ियाउद्दीन की पिटाई की, जिसके कारण Ziauddin की थाने में ही मौत हो गयी।

Ziauddin Murder : परिवार का कहना है कि पुलिस वालों ने जानबूझ कर Ziauddin के कमज़ोर अंगों पर चोट किया जिससे कि उसकी मौत हो जाये। Ziauddin की बर्बरतापूर्ण पिटाई के बाद एसटीएफ के लोग उसे तड़पता हुआ थाने में ही छोड़ कर निकल गए। थाने के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगर तत्काल Ziauddinको अस्पताल पहुँचाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। थाने में घंटों ज़ियाउद्दीन तड़पता रहा, सहायता के लिए चिल्लाता रहा, बार बार कहता रहा कि मुझे अस्पताल पहुंचा दीजिए नहीं तो मै मर जाऊंगा लेकिन पुलिस वालों का कलेजा नहीं पसीजा, उन्होंने एक गिलास पानी भी नहीं दिया। हालत बिगड़ती देखा थाना प्रभारी ने हिरासत में लेने वाले एसटीएस के अधिकारीयों को फोन से जानकारी दिया कि ज़ियाउद्दीन की हालत बिगड़ रही है लेकिन उन्होंने कोई तवज्जो नहीं दिया। जब तक एसटीएफ की टीम थाने पहुँचती तब तक ज़ियाउद्दीन की मौत हो चुकी थी, आनन फानन में अकबरपुर जिला अस्पताल भेजा गया जहाँ डॉक्टरों ने ज़ियाउद्दीन को मृत घोषित कर दिया।

Ziauddin Murder : ज़ियाउद्दीन की भाई की शिकायत पर एसपी आंबेडकर नगर ने एसटीएफ टीम के प्रभारी देवेंद्र पाल सिंह सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सभी को बर्खास्त कर दिया है। आरोपी पुलिस कर्मी अभी फरार चल रहे हैं, किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मेडिकल टीम ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट बंद लिफाफे में पुलिस को सौंप दिया है लेकिन पुलिस ने परिजनों को अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं सौंपा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट को छिपाया जा रहा है।
पुलिस की दरिंदगी से ज़ियाउद्दीन का हँसता खेलता घर देखते ही देखते उजड़ गया, बीवी विधवा हो गयी, बच्चे अनाथ हो गए, बूढ़े माँ और बाप के सामने अँधेरा छा गया। हत्यारों का कुछ नहीं बिगड़ा। पुलिसिया कार्रवाई के नाम पर उनेह लाइन हाज़िर कर दिया गया है जबकि इस तरह का अगर कोई और मामला होता तो हत्यारे जेल में होते।

Ziauddin Murder : पुलिस की इस तरह की गुंडागर्दी और हत्या की वारदातों के सैकड़ों मामले जाँच के नाम पर लंबित पड़े हुए और अपराधी पुलिस कर्मी खुले आम घूम रहे हैं। ऐसा इस लिए होता है कि पुलिस के मामले की जाँच भी पुलिस को ही सौपी जाती है नतीजतन मामला कहीं न कहीं आपस में मिल जुल कर सैटल कर लिया जाता है और पीड़ित न्याय से वंचित रह जाता है। मानव अधिकार आयोग और तमाम जाँच एजेंसियां कठपुतली की तरह से कार्य कर रहीं हैं जिसके कारण लाखों लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और अपराधियों का हौसला और अपराध दोनों बढ़ रहा है। Post By- KD Siddiqui, Email-editorgulistan@gmail.com

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