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SIMI CASE : 127 बेग़ुनाह मुसलमानों को अदालत ने 20 साल बाद किया बाइज्ज़त रिहा

SIMI CASE : 127 बेग़ुनाह मुसलमानों को अदालत ने 20 साल बाद किया बाइज्ज़त रिहा

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by March 6, 2021 National

SIMI CASE : दिल्ली। देर से मिला हुआ न्याय अन्याय से कम नहीं है। ऐसा ही कुछ हुआ है, गुजरात के 12७ बेगुनाह मुसलमानों के साथ। जातिवादी संक्रिण मानसिकता की सरकार ने बेगुनाह लोगों को सिर्फ इस लिए उनकी ज़िंदगी के अनमोल बीस साल छीन लिया क्यों कि वह मुसलमान हैं। २८ दिसंबर २००१ को गुजरात के सूरत शहर की पुलिस ने एक धार्मिक कार्यक्रम से १२७ मुसलमानों को इस लिए उठा कर जेल भेज दिया क्योंकि पुलिस को इस बात का अंदेशा था कि यह लोग सिमी नामक संस्था के सदस्य हैं और संस्था की बैठक में हिस्सा ले रहे थे।

SIMI CASE : शक के आधार पर हुई गिरफ्तारी की सुनवाई में अदालत ने बीस साल लगा दिया। बीस साल बाद ६ मार्च २०२१ को सूरत की अदालत ने इस फर्जी मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ऐसा पुख्ता सुबूत पेश नहीं कर पाया जिससे कि यह साबित हो सके कि आरोपी सिमी से जुड़े हुए हैं और संगठन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मीटिंग कर रहे थे।

SIMI CASE : मुख्य न्यायधीश ए एन दवे ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपियों को यूएपीए कानून के अंतर्गत दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, साथ ही न्यायधीश ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस एवं संतोषजनक साक्ष्य नहीं मिला है। २००१ में सूरत के अठवालाइंस पुलिस ने शहर के सगराम पूरा क्षेत्र से १२७ मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था। मामले की लम्बी सुनवाई के दौरान पांच लोगों की मौत हो चुकी है। जनससता अखबार के अनुसार गिरफ्तार आरोपी गुजरात के आलावा बिहार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, एमपी, राजस्थान, कर्नाटक और यूपी के रहने वाले थे। आरोपियों ने सुनवाई के दौरान अदालत को भरोसा दिलाया कि हमारा सिमी से कोई ताल्लुक नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र की कांग्रेस सरकार ने सितंबर 2001 में स्टूडेंट्स ऑफ़ इस्लामिक मूवमेंट्स इण्डिया (सिमी) पर प्रतिबंध लगाया था।
अब सवाल यह है इन बेगुनाह मुसलमानों की ज़िंदगी के बीस साल कौन वापस करेगा ? बेगुनाह लोंगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं ? Post By- KD Siddiqui, Email-editorgulistan@gmail.com

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