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Hathras Case : PFI और भीम आर्मी के खाते में 100 करोड़ की फंडिंग के यूपी सरकार के दावे को ईडी ने किया ख़ारिज

Hathras Case : PFI और भीम आर्मी के खाते में 100 करोड़ की फंडिंग के यूपी सरकार के दावे को ईडी ने किया ख़ारिज

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by October 9, 2020 U.P.

Hathras case : उत्तर पुलिस द्वारा हाथरस जाने के रास्ते मे गिरफ्तार किए गए केरल के एक पत्रकार, दो PFI सदस्यों और एक अन्य व्यक्ति पर राजद्रोह और यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है। मंगलवार को मथुरा की स्थानीय अदालत में पेश किए जाने के बाद इन चारो को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने गिरफ्तार लोगों की पहचान मलप्पुरम के सिद्दीकी कप्पन, मुजफ्फरनगर के अतीक-उर रहमान, बहराइच के मसूद अहमद और रामपुर के आलम के रूप में की है। यूपी सरकार एंव सत्ताधारी दल के मीडिया संस्थानों ने दावा किया था कि हाथरस जातीय दंगा भड़काने के लिये 100 करोड़ की फंडिंग हुई थी, यह पैसा भीम आर्मी और पीएफआई को मिला था। लेकिन इस दावे को ईडी ने खारिज कर दिया है।

Hathras case: इस तरह की फेक न्यूज़ फैलाने वाले तथाकथित पत्रकारों और सरकार के लोगों पर कोई मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हाथरस में आरोपियों के समर्थन में पंचायत करने वाले लोगों के खिलाफ कोई मामला क्यो नहीं दर्ज किया गया? इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर स्याही फेंककर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले शख्स को मात्र कुछ घंटे बाद ही थाने में बैठाकर क्यों छोड़ दिया गया? इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है। हाथरस की मृतका का चरित्रहनन की कोशिश करने वाले सत्ताधारी दल के नेताओं पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया? इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है। हाथरस के अभियुक्त जेल से चिट्ठी क्यों भेज रहे हैं? इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है। हाथरस में पीड़िता के घर मिलने आने वाले समाजिक कार्यकर्ताओं, राजनेताओं को सर फोड़ने की धमकी देने वाले शख्स पर मुक़दमा दर्ज क्यों नहीं हुआ? इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है। हाथरस के अभियुक्तों पर यूएपीए अथवा राजद्रोह क्यों नहीं लगाया गया?इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।

Hathras case: हज़ार सवालों का एक ही जवाब है, और वह है पीएफआई! पीएफआई यानि मुस्लिम, इतना जघन्य अपराध हो गया और उसका आरोप किसी उर्दू नाम वाले पर नहीं लगा, यह तो अनर्थ है। इसलिये चार नए ‘बलि के बकरे’ तलाश लिए गए। अब ढ़ाई तीन साल में जमानत मिलेगी, सारी हेंकड़ी निकल जाएगी? कोई कह रहा था कि हमारी न्यायव्यवस्था यह है कि चाहे दस गुनहगार छूट जाएं मगर एक बेगुनाह फंसना नहीं चाहिए। वाह क्या ख़ूब कहा है। लेकिन अभियुक्तों के समर्थन में पंचायतें होतीं हैं, चार युवाओं को फलाने ढिमकाने संगठन से जोड़कर उन पर यूएपीए लगाकर जेल में डाल दिया जाता है। कोई अपील नहीं, कोई दलील नहीं. ऐसे कैसे न्याय मिलेगा? कुछ वर्षों बाद जब ये लोग जेल से बाहर आएंगे तब कहा जाएगा कि न्यायपालिका ने ‘न्याय’ दे दिया। आख़िर बेगुनाह होकर भी जेल में क्यों रहना पड़ा? यह सवाल तब भी नहीं उठाया जाएगा।
Post Written By: Wasim Akram Tyagi✍ E-mail: editorgulistan@gmail.com

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