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मजलूमों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले समाजसेवी Dr. Kafeel को किस जुर्म की सज़ा मिल रही है ?

मजलूमों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले समाजसेवी Dr. Kafeel को किस जुर्म की सज़ा मिल रही है ?

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दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील अहमद 10 अगस्त 2017 को उस समय सुर्ख़ियों में आये जब बीआरडी मेडिकल कालेज में दिमागी बुखार से कई बच्चों की मौत हो गयी। दिमागी बुखार से हुई बच्चों की मौत के बाद से गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज सुर्ख़ियों में आ गया। 2017 में ऑक्सीजन की कमी की वजह से 60 बच्चों की मौत की खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। आनन फानन में विभाग ने डॉक्टर कफील पर भ्र्ष्टाचार और लापरवाही बरतने के आरोप में बर्खास्त कर दिया। यूपी सरकार द्वारा बनाई गयी जाँच कमेटी ने डॉक्टर कफील को निर्दोष बताया और सभी आरोपों से बरी कर दिया। जबकि इससे पहले कफील खान आठ महीने की जेल की सजा काट चुके थे। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद कफील खान को जेल से रिहा कर दिया गया और कफील खान ने रिहाई के बाद ख़ुशी जाहिर किया।

बीआरडी मेडिकल कालेज के 2017 के मामले में Dr Kafeel Khan को उन्हीं लोगों ने फंसाने की कोशिश किया था जिन लोगों की लापरवाही से मासूम बच्चों की मौत हुई थी, लेकिन भ्र्ष्टाचार में डूबी व्यवस्था के तार लखनऊ से जुड़े हुए थे जिसके कारण मुख्य आरोपियों को बचा कर कफील खान को मुहरा बनाया गया लेकिन कफील खान के द्वारा इकठ्ठा सबूतों के बलबूते पर व्यवस्था को आक्सीजन कांड से बरी करना पड़ा। कफील खान ऑक्सीजन कांड से तो बरी हो गए लेकिन वह उन भ्र्ष्ट एवं संघी मानसिकता वाले डॉक्टरों और अधिकारीयों के निशाने पर थे जिनकों अपनी पोल खुलने का भय रात-दिन सता रहा था। इस दौरान इन्होने कफील खान के परिवार को भी तरह तरह से प्रताड़ित किया, उनके और उनपर जानलेवा हमला भी करवाया।

कफील खान जेल से रिहा होने के बाद समाज सेवा को ही अपना कर्तव्य समझ कर देश की सेवा में लग गए हैं और जहाँ कहीं किसी आपदा की सूचना मिलती थी वह वहाँ गरीबों और बेसहारा लोगों की सहायता के लिए निकल पड़ते थे। समाजसेवा से कफील खान को पूरे देश से जबर्दश्त समर्थन मिलने लग गया और धीरे – धीरे डॉक्टर कफील खान देश युवाओं के दिलों पर राज करने लग गए। कफील खान की बढ़ती लोकप्रियता भाजपा और संघ की आँखों में चुभ रही थी, और वह सत्ता में बैठे लोग मौके की तलाश में थे कि कफील खान किस तरह से दोबारा जेल भेजा जाये।

जब नागरिकता संसोधन कानून का देश भर में विरोध चल रहा था। तब कफील खान ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बोला कि मोटा भाई हर किसी को हिन्दू और मुस्लिम बनना सीखा रहे हैं, लेकिन इंसान नहीं। आऱएसएस के अस्तित्व में आने के बाद से वह संविधान में विश्वास नहीं करते हैं। नागरिकता संसोधन कानून मुसलमानों को दूसरी श्रेणी का नागरिक बनाता है और बाद में उनेह एनआरसी के क्रियांन्वयन के समय परेशान किया जायेगा। उसके बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ द्वारा मुम्बई से कफील खान को गिरफ्तार कर लिया गया। एसटीएफ के अधिकारीयों के मुताबिक कफील खान ने 12 दिसंबर 2019 को आरएसएस पर अपमानजनक टिप्पड़ी और भड़काऊ भाषण दिया था। कफील खान की गिरफ्तारी के वक़्त स्वराज इंडिया के संथापक योगेंद्र यादव भी उनके साथ मौजूद थे।

अपनी गिरफ्तारी को अन्यायपूर्ण बताते हुए Dr Kafeel khan ने सुप्रीम कोर्ट में बेल के लिए अपील किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को यूपी हाईकोर्ट को भेज दिया। अब कफील खान के इस मामले की सुनवाई इलाहबाद हाईकोर्ट करेगा। 29 जनवरी को कफील खान को मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर के अलीगढ जुडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था जहाँ से उनेह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मंगलवार को कफील खान को लखनऊ लाया गया था। अभी वह यूपी के मथुरा जेल में बंद हैं।
अगर कफील खान ने भ्र्ष्ट अधिकारीयों और डॉक्टरों व नेताओं का साथ दिया होता तो आज जेल में नहीं होते। यह बिडंबना है कि कानपूर मेडिकल कालेज की डॉक्टर आरती लालचंदानी जैसे लोग व्वस्था में बैठ कर समाज में जहर घोल रहे हैं और एक कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और समाज का सच्चा सेवक जेल की सलाखों के पीछे है। Post By : KD Siddiqui, Email : editorgulistan@gmail.com

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