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Politics : राजनैतिक टकराव में फंसा मजदूर, दर – बदर भटकने, भूख और अव्यवस्था से मरने को मजबूर

दिल्ली। कोरोना महामारी के दौरान देश भर में लगे लॉक डाउन में सामान्य परिवारों को कोई खास फर्क भले ही न पड़ा हो लेकिन देश का गरीब मजदूर पूरी तरह से तबाह व बर्बाद हो चूका है। सैकड़ों लोग सड़कों पर पैदल चलते हुए दम तोड़ चुके हैं और हजारों लोग ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे है। श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया श्रम मंत्रालय अपाहिज हो गया है। मजदूरों के अधिकारों की रक्षा की किसी को परवाह नहीं है। लगभग तीन महीने से श्रमिकों के अधिकारों का उललंघन हो रहा है। सरकार आज तक उनके गांव भेजने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं कर पायी है, जिसके कारण लाखों लोग सड़कों पर दम तोड़ रहे हैं। सड़कों पैदल चल रहे मजदूरों में गर्भवती महिलाएं, मासूम बच्चे, बूढ़े और विकलांग शामिल हैं लेकिन उनका दर्द न सरकारों को दिखाई दे रहा है और न ही देश की सबसे बड़ी न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट को। देश के मानवतावादी समाज सेवियों ने अपने प्रयासों से उनको ज़िंदा रखा हुआ है। सड़कों के किनारे जगह जगह लोग मजदूरों की सेवा में खाना, पानी, और जूता चप्पल बांटते दिखाई दे जायेंगे लेकिन इनमें नेता बहुत कम होंगे। अकेले कांग्रेस पार्टी देश भर में भूखों को खाना खिलाने का अभियान चला रही है।

हालात बद से बदतर होने के बाद कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी सामने आये और अपने साथ दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी को लेकर मजदूरों को मथुरा रोड से आनन्द विहार तक अपनी गाडी से छोड़ने लगे तो चौधरी अनिल कुमार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी आगे आयी और उन्होंने एक हज़ार बसें गरीबो की सहायता के लिए यूपी में चलाने की अनुमति मांगी तो उस पर राजनीती शुरू हो गयी। प्रियंका गाँधी के सामने आने के बाद भाजपा को लगा कि उनके निचे की राजनैतिक जमीन खिसक रही है। इस लिए यूपी सरकार ने उनकी बसों को यूपी की सीमा में आने से रोक दिया। आज 20 मई 2020 को तीन दिन हो गया जब से यूपी की सीमा पर प्रियंका गाँधी की एक हजार बसें खड़ी हैं, लेकिन उनको यूपी सरकार चलने की अनुमति नहीं दे रही है।

राजनितिक फायदे और नुकसान के चक्कर में प्रियंका गाँधी द्वारा उपलब्ध बसों को चलने की अनुमति नहीं मिल रही है और सरकारें स्वयं कोई व्यवस्था नहीं कर पा रहीं हैं। जिसके कारण श्रमिक जानवरों से बदतर हालत में सड़कों के किनारे जीवन जीने पर मजबूर है। कल यूपी कांग्रस के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू को गिरफ्तार कर लिया गया और प्रियंका गांधी के सचिव और लल्लू सिंह पर मुकदद्मा दर्ज कर लिया गया। दिल्ली और यूपी की सीमा पर लगभग पांच लाख लोग भूखे -प्यासे अपने अपने गांव जाने की आस में आनन्द विहार बस अड्डे के आस – पास और साहिबाबाद बस अड्डे पर डटे हुए हैं लेकिन संवेदनहीन सरकारों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, वह राजनैतिक फायदा और नुक्सान का आंकलन कर रहे हैं। Report : KD Siddiqui, Email: editorgulistan@gmail.com