Skip to Content

चुनाव में पानी की तरह पैसे बहाने वाले और धर्म व समाज के कथित रक्षक अचानक नपुंसक कैसे हो गये ?

चुनाव में पानी की तरह पैसे बहाने वाले और धर्म व समाज के कथित रक्षक अचानक नपुंसक कैसे हो गये ?

Closed
  • कहा है ? श्रम मंत्रालय, श्रम विभाग, श्रम कानून, मजदूर सन्गठन, मजदूरों के नेता ?

पीठ पर छोटे से बैग में दो जोड़ी कपड़ा, सुखी रोटी और जेब में आधार कार्ड लेकर साथ में बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शहरों से निकल कर पैदल हजारों किलोमीटर दूर अपने गांव अपनो के पास पहुंचना चाह रहे हैं। इनके पर फट चुके हैं, शरीर थक चुका है, दर्द, पीड़ा और भूख को दबाये चले जा रहे हैं, किसी के ऊपर कही बस चढ़ जा रही है तो कहीं ट्रेन, फिर सड़कर और समाज के लोग मूक दर्शक बने है, क्योंकि कोरोना के भय ने उनके अंदर के इंसानियत को खत्म कर दिया है और संवेदनहीन केंद्र सरकार को भी यह लोग और इनकी पीड़ा दिखाई ही नही दे रही है। इनके पास न खाने के लिये पैसा है। न जमा पूंजी है और न ही गांव पहुंचने के बाद वहां भी कोई जीविका का साधन है। बस एक विश्वास है जो अपनो के पास जल्द से जल्द पहुंचने के लिये खींच रहा है।

केंद्र सरकार श्रमिकों की अपेक्षा अमीरों के लिये ज्यादा चिंतित है। विदेशों में फंसे लोंगों के लिये मंत्रालय रात दिन काम कर रहा है। उनके लिये जहाज का इन्तेजाम कर रही है और आज से 15 जोड़ी ट्रेन भी चलेगी लेकिन इनमें कोई गरीबो के लिये नही है क्योंकि इस ट्रेन में सिर्फ वातानुकूलित डिब्बे है और इनकी बुकिंग ऑनलाइन ही होगी। अब आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि यह मजदूरों की पहुंच से कितनी दूर है।

बिना किसी नीति के केंद्र सरकार के द्वारा लॉक डाउन की इस घोषणा में नुकसान तो सबका हुआ है लेकिन जिसके पास कोई जमा पूंजी नही है। जो रोज कमाता और खाता है वह पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। जो तिनका तिनका जोड़ कर उसने रखा था वह सब खत्म हो गया है। अब कर्ज लेकर ही अपना गुजारा कर सकता है। इसके अलावा उसके पास दूसरा कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा है।

बिडम्बना देखिये की हजारों किलोमीटर चल कर आने वालों के पैरों में मरहम लगाने ले बजाय पुलिस भी उनके साथ जानवरो जैसा बर्ताव कर रही है। कही मुर्गा बनाया जा रहा है तो कहीं दौड़ा दौड़ा कर पीटा जा रहा है।

जो लोग टीवी पर बैठ कर हिन्दू और मुसलमानों की रक्षा का ठेका लेते हैं, वह हिन्दू युवा वाहनी, अली सेना, अकबर सेना, हनुमान सेना, बजरंग दल, और धर्म के सबसे बड़े रक्षक आरएसएस, जमीयत उलेमा ए हिन्द जैसी संस्थाएं सब के सब बिलों में छुप गए हैं।

देश के हिंदुओं और मुसलमानों को अब समझने का वक़्त है कि यह तथाकथित धर्म के ठेकेदार सिर्फ़ और सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिये अपने ही समाज को धर्म की आड़ में ठगने के लिये आते है, किसी धर्म और पंथ से उनका कोई दूर दूर तक सम्बंध नही होता है।

धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर यह लोग देश को ठग रहे है। इसका यही प्रमाण है कि आज लाखों की सँख्या में सड़कों पर पैदल चल रहे, मर रहे, बिलाप कर रहे, भूख से तड़प रहे, सहायता के लिये भटक रहे, जीने के लिए एक रोटी के हाथ फैलते लोंगों की सुध लेने वाला कोई नही है।

गृह मंत्री कमरे में बैठे हुये, प्रधानमंत्री किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए है। जब डॉक्टर्स, पुलिस और सफाईकर्मी बाहर निकल कर कोरोना से जूझ रहे हैं तो देश की सत्ता संभाल रहे लोग क्यों घरों में छुपे हुए हैं ? क्या मजदूरों का दर्द इनको दिखाई नही दे रहा है ?

  • 12 या 15 ट्रेन सिर्फ अमीरों के लिये पहले क्यों चलाई जा रही है ? सड़को पर पैदल चल रहे लोंगों को क्यों नही तत्काल व्यवस्था करके उनके गांव पहुंचाने का इन्तेजाम किया जाता है ?

समझ में यह नही आ रहा है कि चुनाव में पैसे को पानी की तरह बहाने वाले और कथित धर्म के रक्षक अचानक नपुंसक कैसे बन गए ? दिल्ली में दुनिया का सबसे बड़ा वातानुकूलित कार्यालय और पूरे देश के सभी राज्यों में कार्यालय बनाने और जमीन खरीदने पर सैकड़ो अरब रुपया खर्च करने वाली भाजपा के पास आर्थिक तंगी कैसे आ गयी? लेखक : केडी सिद्दीकी, ईमेल : editorgulistan@gmail.com

Previous
Next