Skip to Content

IAS Rani Nagar का स्तीफा नामंजूर, बीसी प्रधान ने समर्थन करने वालों का किया आभार

IAS Rani Nagar का स्तीफा नामंजूर, बीसी प्रधान ने समर्थन करने वालों का किया आभार

Closed

हरियाणा सरकार की आईएएस अधिकारी रानी नागर तीसरे चरण के लॉक डाउन शुरू होने से पहले अपना त्यागपत्र सरकार को सौंप कर अपने गृह जनपद जनपद गौतमबुद्ध नगर आ गई हैं। इस समय वह 14 दिन के कोरन्टीन में हैं। रानी के द्वारा सरकार को नौकरी से त्यागपत्र देने की खबर से जहाँ गुर्जर समाज दुःखी था, वही राजनैतिक गलियारे में भी रानी नागर के त्यागपत्र को लेकर चर्चा शुरू हो गयी थी। मायावती और केन्द्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर सहित सुपूर्व मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक सहित सभी पार्टी के नेता एवं सामाजिक संगठन व सर्वसमाज के भारी विरोध के बाद आज हरियाणा सरकार ने रानी नागर का स्तीफा नामंजूर कर दिया।

रानी नागर के गृह जनपद के समाजसेवी और किसानों के अधिकारों के संघर्ष करने वाले राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य चौधरी वीसी प्रधान ने उपरोक्त सभी संस्थाओं और महानुभाओं का आभार व्यक्त किया है जिन्होंने ने रानी नागर के समर्थन में आवाज़ बुलंद किया।
उन्होंने कहा कि हम सबकी एकजुट आवाज़ के वजह से  हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर ने IAS रानी नागर का इस्तीफ़ा नामंज़ूर कर दिया। हम हरियाणा मुख्यमंत्री के आभारी है , लेकिन लड़ाई तब तक जारी रहेगी। जब तक सरकार उनको नई पोस्टिंग नही देती है और दोषी अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही नहीं करती है। अगर हरियाणा सरकार कार्यवाही नहीं करती है तो  मोदी का महिला सुरक्षा व बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कागजों में ही रह जायेगा और खोखला साबित होगा। देश में पिछड़ा वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात में संसद, विधान सभा, न्यायपालिका, सरकारी सेवाएं, प्राइवेट सेक्टर में  प्रतिनिधित्व बहुत ज़रूरी है। आज देश मे अन्य पिछड़ा वर्ग समाज को जागृत करने का आंदोलन बहुत ज़रूरी है ताकि सभी सामाजिक समानता और सामाजिक न्याय को समझ सकें और इसके लिये मांग उठा सकें। पूर्ण न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।

ग़ौरतलब है कि हरियाणा सरकार की आईएएस अधिकारी रानी नागर को हरियाणा सरकार के भृष्ट अधिकारियो से जान का खतरा है। इस लिये उन्होंने अपनी नौकरी से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया था। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली खट्टर सरकार में जब एक आईएएस अधिकारी बिटिया की जान सुरक्षित नहीं है तो फिर हरियाणा में आम लड़कियों कि क्या हालात होगी इसका अंदाज़ा आप लगा सकते है। प्रदेश की भृष्ट व्यवस्था में मची लूट पाट में अधिकारियों का साथ नहीं देने के कारण रानी नागर लोंगों की आंख में खटकने लग गयी और लुटेरे अधिकारियों ने जब देखा कि यह लडक़ी ईमानदार है और इसके रहते इनकी दाल गलने वाली नही है तो उन्होंने रानी नागर को रास्ते से हटाने की योजना बना लिया। रानी को जैसे ही इसकी भनक लगी कि यह भृष्ट लोंगों का गैंग उसकी जान लेना चाहता है, तो अपने सिद्धांतों पर अडिग बेटी ने नौकरी छोड़ देना मुनासिब समझा लेकिन भृष्ट लोंगों आगे समझौता नहीं किया।

आइएएस रानी नागर

फेसबुक का लिया सहारा
रानी नागर ने जब देखा कि सीएम कार्यालय से लेकर निचले स्तर तक सब के सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं। तो वह अपने आप को निःसहाय और असुरक्षित महसूस करने लगी। रानी नागर ने फेसबुक पर 24 मार्च 2020 को एक विडियो अपलोड करके उसमें बताया कि वर्ष 2019 से वह चंडीगढ़ के सेक्टर 6 के यूटी  गेस्ट हाउस के कमरा नम्बर 311 में अपनी बहन के साथ रहती हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ पर हम दोनों बहनों की जान को खतरा है। रानी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मैंने कोर्ट में एक मुकद्दमा दायर किया हुआ है। उन्होंने वीडियो में कहा कि अगर मुझे या मेरी बहन को कुछ हो जाता है तो केस के माध्यम से सभी जानकारी मिल जाएगी। अपनी वीडियो में उन्होंने बताया कि मुकद्दमा नम्बर 3573/2019 अभी अदालत में विचाराधीन है।

गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर की है रानी नागर

उत्तर प्रदेश के जिला गौतमबुद्ध नगर के दादरी तहसील के बादलपुर गांव की बेटी रानी नागर पुत्री रत्न सिंह नागर ने अपने अथक प्रयासों से 2014 में आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण करके माँ बाप के सपनो को साकार किया और हरियाणा कैडर की आईएएस अधिकारी बनी। वह सुर्खियों जब आयीं जब उन्होंने वर्ष 2018 में पशुपालन विभाग के अतिरिक्त सचिव रहते हुए एक अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने अपने साथ हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव से किया था लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नही हुई। 14 नवम्बर 2018 से रानी नागर अतिरिक्त निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता एवं 7 मार्च 2020 से निदेशक आर्काइव का पदभार संभाल रही हैं।

सीएम कार्यालय से नहीं मिली मदद
हरियाण सरकार के सीएम खट्टर और प्रमुख सचिव को शिकायत पत्र लिखने के बाद जब वहां से कोई सहायता नहीं मिली तो रानी नागर ने 2019 में चंडीगड़ की सीजेएम अदालत में आरोपी अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकद्दमा दायर किया। अभी केस की सुनवाई पूरी नही हुई है लेकिन अधिकारियों को यह आभाष हो गया कि अब अदालत से उनके लिये बचना मुश्किल है। कानूनी कार्रवाई के भय से भयभीत अधिकारियों ने रानी को रास्ते से हटाने की योजना बना लिया। रानी नागर ने यह खुलासा 24 मार्च 2020 को सुबह 05 बजे किया है।

रानी नागर के कमरे का दरवाजा


इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि वह दहशत में रात भर सो नहीं पायी थीं। रानी के फेसबुक पर वीडियो अपलोड करने के बाद से सरकारी मशीनरी में खलबली मच गई और आनन फानन में मामले को दबाने का प्रयास हुआ लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, वीडियो मीडिया के हाथ तो लगी ही थी तब सोशल मीडिया पर लाखों लोंगों ने देख लिया था।

रानी नागर ने चंडीगढ़ से अपने गांव बादलपुर आने के बाद ट्वीट किया कि चंडीगढ़ के यूटी गेस्ट हाउस में जहां वह रहती थीं वहां पर उनके खाने में कई बार लोहे की कीलें मिली है। उनके रूम का दरवाजा जर्जर हालत में था जहां से किसी भी घटना को अंजाम दिया जा सकता था। रानी नागर को अभी भी अपनी जान का खतरा बना हुआ है।

Previous
Next