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Farmers Protest : धरने के 16 वें दिन किसानों के बीच पहुंचे ज़िला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक

Farmers Protest : धरने के 16 वें दिन किसानों के बीच पहुंचे ज़िला अधिकारी और पुलिस अधीक्षक

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by September 2, 2019 Azamgarh, U.P.

Farmers Protest अतरौलिया। भूमि अधिग्रहण में किसानों को न्यूनतम मूल्य की दर से मिलने वाले मुआवजे से नाराज किसानों के प्रदर्शन का आज 16 वां दिन है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। आज 16वें दिन किसानों के धरना स्थल पर पहुंचे जिलाधिकारी ने किसानों से वार्ता करके धरना प्रदर्शन खत्म करवाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली।

गौरतलब है कि अतरौलिया क्षेत्र में बन रहे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे के निर्माण हेतु अधिग्रहित की जा रही 39 गांवों के किसानों की जमीन के उचित मुआवजा न मिलने को लेकर 18 अगस्त से लगतार धरना किसानों का धरना जारी है। हालांकि आज किसानों द्वारा आजमगढ़ फैजाबाद मुख्य मार्ग जाम करने की तैयारी भी पूरी तरह से की गई थी। सैकड़ों की संख्या में किसान हाइवे जाम करने के लिए सुबह से ही हाथ में लाठियां लेकर पहुंचे थे।

Farmers Protest इस दौरान उप जिलाधिकारी बुढ़नपुर, क्षेत्राधिकारी बुढ़नपुर , सहित अतरौलिया, कप्तानगंज, महाराजगंज,अहरौला ,तहबरपुर, आदि कई थानों की पुलिस फोर्स भी मौजूद रही। जिलाधिकारी के पहुंचने के पहले किसानों ने एकजुटता का परिचय देते हुए मंच से किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। मंच पर पहुंचे जिलाधिकारी ने कहां कि किसान अन्नदाता है। इनकी जमीन अमूल्य है और सरकार द्वारा जमीन का मूल्य न देकर के अनर्थ किया जाता है। जमीन किसानों की है लेकिन विकास की सारी पटकथा इस जमीन पर ही लिखी जाती है।
2013 के बाद सर्किल रेट के 4 गुना भुगतान दिलाने का कार्य संसद और विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की मांग पर सरकार ने दिया। जिससे उद्योगपतियों ने काफी विरोध जताया। सरकार सदैव जनता के कल्याण के लिए कार्य करती है। वह चाहे पिछली सरकारें हो अथवा वर्तमान की सरकार। हमको भी एक  दायित्व का निर्वहन करना है। इस हाइवे के निर्माण के लिए जो किसानों से जमीन ली जा रही है। वह कतई जबरदस्ती नहीं ली जाएगी यह जमीन किसानों से सहमति के आधार पर ही ली जाएगी। हालांकि यह एक केवल ड्राफ्ट है न कि अधिग्रहण किया जा रहा है। जमीन पर सरकार की योजना है। सड़क बनाने के लिए हम को जमीन की जरूरत है।

Farmers Protest in atraulia सड़कों के निर्माण से ही विकास के रास्ते खुलते हैं। जिससे लोगों को सुगमता होती है। उन्होंने नोएडा का जिक्र करते हुए कहा कि आज सड़कों के जाल के नाते नोएडा दुनिया के नक्शे पर है। हालांकि किसानों की जमीन जब जाती है तो उनको पीड़ा भी झेलना पड़ता है। 2016 में यूपीडा द्वारा किसानों से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए सहमति से ही जमीन ली गई थी। जो पूर्व के जिलाधिकारियों ने तय किए थे। मेरे अंदर भी मानवीय संवेदनाएं हैं। ढाई माह हुए इस जिले के कलेक्टर के रूप में आये हुए। अगर मेरा किसान धरना पर बैठा रहा तो इस बात का मुझे भी अफसोंस हो रहा है। उन्होंने किसानों से कहा कि किसी का कतई अहित नहीं होने दिया जाएगा।

15 दिन का समय देते हुए उन्होंने किसानों जनप्रतिनिधियों से कहा कि पीड़ित किसानों का असहमति प्रमाण पत्र क्रमशः मेरे पास भेज जाय जिसको मैं यूपीडा के चेयरमैन अवनीश अवस्थी के  माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके लेकिन किसान भी फोर लेन के मुआवजा की तरह मांग ना करें।
विकास में किसान भी अपनी भूमिका निभाए आप लोग भुगतान के लिए अपनी मांगे उचित ही रखिए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी जनता और सरकार के बीच में एक पुल होते हम पुल के रूप में कार्य करते हुए आपकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का कार्य करेंगे और  आप लोगों को यह संदेह नहीं होना चाहिए की जिलाधिकारी किसी प्रकार की जबरदस्ती कर रहे हैं। उन्होंने विकास में शुरुआती कष्ट होने की बात का जिक्र करते हुए कहा कि 9 माह कष्ट सहने के बाद ही मां बच्चे को जन्म देती।
उन्होंने संघर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि एेसी गाड़ियां बनाने वाले लोग सड़क पर रहते हैं लेकिन इसके मालिक एेसी में घूमते हैं।
इस दौरान  विधायक डॉक्टर संग्राम यादव, पूर्व मंत्री शंभूनाथ सिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख चंद शेखर यादव, फूलचंद यादव, चंद्रजीत यादव, शीतला निषाद, रामप्यारे यादव, आशुतोष मिश्रा, सुरेंद्र यादव, जय गोविंद विश्वकर्मा, दिलीप सिंह, सूबेदार मिश्रा, अमरनाथ पांडे, , हरिराम यादव बागी फूलचंद यादव,एवम बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
रिपोर्ट: राजेश सिंह
Email: editorgulistan@gmail.com

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